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झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।

सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हरषाने वाला, मातृभूमि का तनमन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

स्वतंत्रता के भीषण रण में, लखकर जोश बढ़े क्षणक्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में, मिट जावे भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय, हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय, स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ, देशजाति पर बलिबलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इसकी शान जाने पावे, चाहे जान भले ही जावे,
विश्वविजय करके दिखलावे, तब होवे प्रणपूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

हमारा राष्ट्रीय ध्वज हम सभी भारतवासियों की विश्व में एक अलग पहचान स्थापित करता है। हम सभी अलग-अलग धर्मों , जातियों , पंथों में बंटे होने के बावजूद भी एक हैं , जब बात तिरंगे की आती है तो हम सब एक होकर , इस तिरंगे की आन-बान-शान बनी रहे , अपनी जान तक न्योछावर कर देते हैं।

हम सभी भारतवासी अपनी एकता, अखण्डता का परिचय देते हुए अपने राष्ट्रीय ध्वज को अपने-अपने घरों पर फहराएंगे , और समाज को अपनी एकता व अखण्डता का परिचय देंगे। हम शपथ लेते हैं कि अपने मकानों पर किसी भी राजनैतिक दल के झंडे को नहीं लगाएंगे, बल्कि अपने राष्ट्र का ध्वज , “तिरंगा” ही फहराएंगे। और इसकी आन-बान-शान को बरकरार रखने के लिए हमेशा दिल-ओ-जान से तैयार रहेंगे।

हमारी संस्था इस बात के लिए प्रतिबंध है कि हम समाज में भाईचारा सामाजिक सौहार्द व समरसत्ता को बनाए रखें। जातिवाद भेदभाव एवं अस्पृश्यता का जड़मूल से उन्मूल लोगों में परस्पर प्रेम एवं सौहार्द बढ़ाएं तथा समाज के सभी वर्गों एवं वर्णों के मध्य एकता स्थापित करें। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि हम अपने सदस्यों के घरों पर उनको तिरंगा ध्वज पर आने के लिए प्रेरित करेंगे। ज्यादातर लोग अपने घरों पर किसी ने किसी राजनीतिक दल के झंडों को शान देते हैं जिसकी वजह से पड़ोसियों से उनके रिश्ते तल्ख हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि पड़ोसी भी किसी ना किसी राजनीतिक दल से प्रभावित होता है और उस धर्म के झंडे को अपने घर पर स्थान दिया होता है।इन झंडो की वजह से हम ना चाहते हुए भी एक दूसरे के प्रति घृणा का भाव रखने लग जाते हैं और मन ही मन उसे अपना दुश्मन मान लेते हैं। तिरंगा एक ऐसा ध्वज है जो दिलों को एक दूसरे से जोड़ता है तथा हमें अपने राष्ट्र के प्रति एकीकृत करता है। हम कहीं भी तिरंगे को फहरता हुआ देखते हैं तो हम अपने दिल में सकारात्मकता का श्राव होने लगता है और हम जोश से भर जाते हैं। इसलिए हम किसी भी संकल्पित होकर अपने-अपने घरों पर तिरंगा ध्वज पर फ़रहाएंगे और इसके सम्मान का पूरा ख्याल रखेंगे। आइए हम सब मिलकर “हर घर तिरंगा अभियान “को सफल बनाएं।

 

जानिए क्या है राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कायदे-कानून

ध्वज संहिता-भारत के स्थान पर भारतीय ध्वज संहिता-2002 को 26 जनवरी 2002 से लागू किया गया है।

  • जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
  • सरकारी भवन पर झंडा रविवार और अन्य छुट्‍टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है।
  • झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
  • जब झंडा किसी भवन की खिड़की, बालकनी या अगले हिस्से से आड़ा या तिरछा फहराया जाए तो झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।
  • झंडे का प्रदर्शन सभा मंच पर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उनके दाहिने ओर हो।
  • झंडा किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।
  • फटा या मैला झंडा नहीं फहराया जाता है।
  • झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।
  • किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊँचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में रखा जाएगा।
  • झंडे पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए।
  • जब झंडा फट जाए या मैला हो जाए तो उसे एकांत में पूरा नष्ट किया जाए।

भारतीय ध्वज संहिता – संसोधन

भारतीय नागरिक अब रात में भी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं। इसके लिए शर्त होगी कि झंडे का पोल वास्तव में लंबा हो और झंडा खुद भी चमके। गृह मंत्रालय ने उद्योगपति सांसद नवीन जिंदल द्वारा इस संबंध में रखे गये प्रस्ताव के बाद यह फैसला किया। इससे पहले जिंदल ने हर नागरिक के मूलभूत अधिकार के तौर पर तिरंगा फहराने के लिहाज से अदालती लड़ाई जीती थी। कांग्रेस नेता जिंदल को दिये गये संदेश में मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव की पड़ताल की गयी है और कई स्थानों पर दिन और रात में राष्ट्रीय ध्वज को फहराने के लिए झंडे के बड़े पोल लगाने पर कोई आपत्ति नहीं है। जिंदल ने जून 2001 में मंत्रालय को दिये गये प्रस्ताव में बड़े आकार के राष्ट्रीय ध्वज को स्मारकों के पोलों पर रात में भी फहराये जाने की अनुमति मांगी थी। जिंदल ने कहा था कि भारत की झंडा संहिता के आधार पर राष्ट्रीय ध्वज जहां तक संभव है सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच फहराया जाना चाहिए, लेकिन दुनियाभर में यह सामान्य है कि बड़े राष्ट्रीय ध्वज 100 फुट या इससे उंचे पोल पर स्मारकों पर दिन और रात फहराये गये होते हैं।