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उद्देश्य

हम, भारत के लोग, भारत को भारतीयता के आधार पर, भारतीय मूल्यों से परिपूर्ण, तथा भारतवासियों को विश्व पटल पर श्रेष्ठतम स्थान दिलाने के लिए :
सामाजिक, आर्थिक, व राजनैतिक समानता,
अभिव्यक्ति, धर्म, विश्वास, व ईमानदारी से
भरा हुआ चरित्र, तथा उन सब में स्वयं की गरिमा

और राष्ट्र की एकता, अखण्डता, और सम्प्रभुता
सुनिश्चित करने वाली बंधुता को बढ़ाने के लिए
सच्ची निष्ठा और पूरी लगन व मेहनत से दृढ संकल्पित
होकर सम्पूर्ण क्रांति के रास्ते को अपनाते हुए समाज को स्थापित करने के लिए स्वयं को राष्ट्र के लिए अर्पित करते हैं।

हिंदुस्तान 1st एक मुहिम है देश में बदलाव की।

हमारा मानना है कि देश एक–एक नागरिक से मिलकर बनता है, देश की उन्नति व पिछड़ेपन के लिए एक–एक नागरिक जिम्मेदार है।

कोई बाहर से आकर ना भ्रष्टाचार करता है, ना अपराध करता है हममें से ही वो लोग होते हैं।

अत: यह मानना पड़ेगा कि देश को महान, अग्रणी व सर्वश्रेष्ठ बनाना है, तो अपने घर की तरह ही गली, मौहल्ले, शहर व राष्ट्र को अपना मानना होगा। अपनी संपत्ति की तरह ही सरकारी संपत्ति को अपना मानना होगा। अपने रिश्तेदारों व दोस्तों की तरह ही सभी देशवासियों का सम्मान करना होगा। किसी भी भ्रष्टाचार व अपराध को अंजाम देने से पहले एक पल के लिए यह सोचना पड़ेगा कि आज वह कर रहा है, कल कोई उसके साथ भी कर सकता है। अर्थात सभी को समान रूप से अपने जीवन में एक मंत्र का पालन करना पड़ेगा कि राष्ट्र से नागरिक उन्नति करता है और राष्ट्र नागरिक से। राष्ट्र रूपी माला नागरिक रूपी मोतियों से ही बनती है। मोती जितने सुंदर होंगे माला भी उतनी ही नायाब और सर्वश्रेष्ठ बनेगी। इसलिए आज से ही अपने आचरण में इस मंत्र को शामिल करें और जीवन में अपनाएं।

देश के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए हमें एक मूलमंत्र को अपनाना पड़ेगा, वह है :- “स्वदेशी”

अपने सामान्य जीवन में ज्यादा से ज्यादा देश में बने सामान का प्रयोग करें ताकि देश का पैसा देश में रूक जाए और हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करे। ऐसा करने से हमारे लोगो को रोजगार भी मिलेगा। क्योकि आर्थिक रूप से सम्पन्न राष्ट्र स्वभिमानी राष्ट्र हो सकता है और राष्ट्र के नागरिको में देशभक्ति की भावना जगाकर सच्चे नागरिक बनाना और उन्हें बुराइयों से दूर ले जा कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के अभियान का नाम है “हिन्दुतान 1st”

नागरिकों में राष्ट्रीय चरित्र की भावना सर्वोपरि हो यही इसका उद्देश्य है और एक ही मंत्र है –“नागरिक देशभक्ति करे–आर्थिक विकास के साथ”

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वर्तमान स्थिति

हिंदुस्तान एक महान राष्ट्र है और इसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इतिहास में हिंदुस्तान को विश्व गुरू का दर्जा मिला हुआ था। स्वामी विवेकानन्द, चाणक्य व बहुत से महान लोगों का विश्व इतिहास में अपना अहम स्थान रहा है। हमारी एक समृद्ध अर्थ–व्यवस्था थी। विश्व हमें सोने की चिड़िया के रूप में जानता था। लेकिन आज समाज में हर ओर हताशा, लूट–खसोट, अपराध व भ्रष्टाचार का माहौल है। अखबार लूट, हत्या, बलात्कार व भ्रष्टाचार की खबरों से भरे रहते हैं। हर बार कोई नेता नया मुखौटा लगाकर राम-राज्य का सपना दिखाकर राज हासिल कर लेता है। लेकिन हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं।

  • गोरे अंग्रेजों से आजाद होने के समय एक डालर की कीमत एक रूपये के बराबर थी लेकिन आज डालर और रूपये में जमीन–आसमान का अंतर है। – ऐसा क्यों ?
  • देशभक्ति से ओतप्रोत राष्ट्र आज भ्रष्ट राष्ट्र की शक्ल में खडा है। – ऐसा क्यों ?
  • शहीद और देशभक्त होने का ठेका कुछ लोगों के ही पास है। – ऐसा क्यों ?
  • राष्ट्रपुत्र भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों को भी आज तक नहीं मिला शहीद का दर्जा। – ऐसा क्यों ?
  • युवा बेरोजगारी, नशे व अपराध के दलदल में धंसता जा रहा है। – ऐसा क्यों ?
  • नेता लोगों को धर्म, जाति और समुदाय के नाम पर आपस में लड़ा रहे हैं और हम लड़ रहे हैं। – ऐसा क्यों ?
  • भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में संस्कार कहीं पीछे छोड़ दिए। – ऐसा क्यों ?
  • बिना तुलना किए स्वदेशी को निम्नस्तरीय कहना। – ऐसा क्यों ?

कैसे बनाएं हिंदुस्तान 1st

जब–जब व्यक्तिगत चरित्र, राष्ट्रीय चरित्र की भावना से ऊपर चला जाता है, तब–तब न केवल व्यक्ति पिछड़ता है बल्कि राष्ट्र भी पिछड़ता है।”
आइए समझते हैं कि कमी कहाँ है ?”

जिस तरह हम अपने घर को अपना समझते हैं, लेकिन गली, मोहल्ले, शहर को नहीं, हम अपने घर के रख–रखाव, सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं लेकिन गली, मोहल्ले, शहर और देश को सरकार के भरोसे छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि देश के प्रति हमारा फर्ज पहले बनता है। हम अपने छोटे–छोटे लालच के लिए टैक्स चोरी करते हुए आखिर क्यों भूल जाते हैं कि यह पैसा भी हमारे ही विकास में लगना है। हम अपने स्वार्थ के लिए व समय बचाने के लिए भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुए पल भर के लिए भी नहीं सोचते।

उदाहरणतः हम अपने छोटे–छोटे नाजायज काम करवाने के लिए रिश्वत देते हैं, जो अंततः हमारे लिए ही घातक है। हम अपराधमुक्त समाज की अपेक्षा करते हैं। लेकिन जब हमारा अपना कोई संगीन अपराध करता है तो हम रिश्वतखोरी या दबाव द्वारा उसे बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। हम अक्सर बस, सड़क, ऑफिस व सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं व लड़कियों पर फब्तियाँ कसते हैं व कुदृष्टि डालते हैं, जबकि अगर कोई हमारी माँ– बहन या पत्नी के बारे में एक शब्द भी कह दे तो हम जान लेने पर उतारू हो जाते हैं। आखिर हमें यह समझना होगा कि देश को अगर विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाना है तो इस बात का सदैव ध्यान रखना होगा कि देश एक–एक नागरिक से मिलकर बनता है। देश की उन्नति व पिछड़ेपन के लिए भी हर एक नागरिक ही जिम्मेदार है।

“कोई बाहर से आकर ना भ्रष्टाचार करता है ना अपराध करता है, बल्कि हम में से ही वो लोग होते हैं जो इन बुराईयों को बढ़ावा देते हैं।”

अतः यह मानना पड़ेगा कि देश को महान, अग्रणी व सर्वश्रेष्ठ बनाना है तो अपने घर की तरह ही गली, मोहल्ले, शहर व राष्ट्र को अपना मानना होगा। अपनी सम्पत्ति की तरह ही सरकारी सम्पत्ति को अपना मानना होगा। अपने रिश्तेदारों व दोस्तों की तरह ही सभी देशवासियों का सम्मान करना होगा। किसी भी भ्रष्टाचार व अपराध को अंजाम देने से पहले एक पल के लिए यह सोचना पड़ेगा कि आज वह किसी के साथ कर रहा है तो कल कोई उसके साथ भी कर सकता है।

सभी को समान रूप से अपने जीवन में एक मंत्र का पालन करना पड़ेगा कि “राष्ट्र से नागरिक उन्नति करता है, और राष्ट्र नागरिक से”। राष्ट्र रूपी माला नागरिक रूपी मोतियों से ही बनती है। मोती जितने सुंदर होंगे माला भी उतनी ही नायाब और सर्वश्रेष्ठ बनेगी। इसलिए आज से ही अपने आचरण में व सामान्य व्यवहार में इस मंत्र को शामिल करें और जीवन में अपनाएं।

– “राष्ट्र प्रथम, राष्ट्रीय चरित्र भावना प्रथम,तभी बनेगा भारत विश्वगुरु”

हिन्दुस्तान फिर से विश्वगुरु तभी बनेगा जब व्यवस्था परिवर्तन होगी। और व्यवस्था परिवर्तन के लिए ना तो कोई आसमान से आएगा और ना ही धरती को चीरकर निकलेगा। यह एक दिन में होने वाला परिवर्तन नहीं है। अगर राष्ट्र के सभी नागरिक ठान लें और अपने व्यक्तिगत जीवन में कुछ छोटे–छोटे बदलाव करें तो अवश्य ही होगा भारत विश्व गुरू।

हमें लगता है,वो छोटे–छोटे बदलाव ये हो सकते हैं, जिनको हम अपने जीवन में अपनाएँ

  • अपने संवैधानिक अधिकारों की पूरी जानकारी रखें, तभी कोई अधिकार जताएं।
  • अपने नैतिक कर्तव्य का भी पूरा ज्ञान लें ताकि अपने जीवन में उनका निर्वाह कर सकें।
  • राष्ट्र हमारा है, राष्ट्र की सम्पत्ति हमारी है, ना इसका नुकसान करेंगे ना होने देंगे।
  • राष्ट्र ध्वज हमारी आन-बान-शान है। हम किसी पार्टी या समुदाय विशेष के झण्डे की बजाय राष्ट्रीय ध्वज को अपने घरों पर फहराएंगे।
  • हम अपने देश को धर्म, मजहब, जाति, रंग, व क्षेत्र के आधार पर न तो बाटेंगे और न ही किसी व्यक्ति को बाँटने देंगे।
  • राजनीति में योग्य लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, ताकि सही मायने में लोकतंत्र का पालन हो सके।
  • भारतीय संविधान का सम्मान करते हुए, पूर्ण रूप से उसका पालन करेंगे, और समय के अनुसार सार्थक सुधार की अपील और उसका महत्व लोगों तक पंहुचाएंगे।
  • स्वदेशी वस्तुओं का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करेंगे व करवाएंगे।

जब सभी नागरिक इन बातों को अपने जीवन में अपनाएंगे तो अपने आप हो जायेगा–Hindustan 1st

हिंदुस्तान 1st तक का रास्ता

अगर हर क्षेत्र में हमें हिन्दुस्तान को 1st बनाना है। तो उसके लिए सभी नागरिकों को देश प्रेम व राष्ट्रीय चरित्र की भावना जगानी होगी तथा नागरिकों को अधिकार व कर्तव्य का बोध कराना होगा व स्वदेश प्रेम जगाना होगा। इसके लिए निम्र प्रकार से कार्य करने पड़ेंगे।

  1.  किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में किसी भी संगठन व मुहिम की ताकत होती है, उसके सदस्यों की संख्या. अत: ज्यादा से ज्यादा संख्या में नागरिकों को हिन्दुस्तान 1st के बारे में बताकर जोडऩा होगा।
  2. हमारा राष्ट्र राज्यों से मिलकर बना है, राज्य जिलों से मिलकर बना है, जिले गांव व शहर से मिलकर बने हैं, शहर व गांव मौहल्ले से मिलकर बने हैं, मौहल्ले गलियों से मिलकर बने हैं, गलियां मकान से मिलकर बनी हैं। हम सभी नागरिक अपने मकानों का ख्याल रखते हैं, लेकिन गली, मौहल्ले, शहर, गांव, जिले, राज्य व देश को सरकार के भरोसे छोड़ देते हैं, जबकि सभी नागरिकों का अधिकार एक समान है। अत: गली वह सबसे छोटी ईकाइ है, जिसकी जिम्मेदारी नागरिकों को लेने की जरूरत है।
  3. इसलिए प्रयास परिवार के जिम्मेदार सदस्य रोज किसी ना किसी सदस्य की गली में जाकर, गली में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दुस्तान 1st के बारे में बताकर उन्हें जोडऩे की कोशिश करेंगे। इसके उपरांत सभी लोगों के साथ उस गली की साफ–सफाई करके स्ववच्छता का फायदा बताएंगे। तथा लोगों को उनकी गली को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करेंगे। और सभी लोगों को अपने घर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करेंगे। उस गली की बाकी समस्याओं को नोट करेंगे, गली मेें उचित पौधा रोपण करेंगे। लोगों को इन पौधों को गोद लेने के लिए प्रेरित करेंगे और राष्ट्रीय-गीत के साथ दैनिक प्रचार का अंत करेंगे।
  4. आज हम सभी देश प्रेम की भावना रखते हैं। समाज में फैली बुराईयों जैसे भ्रष्टाचार, अपराध, जैसी संगीन बुराईयों के खिलाफ लडऩा चाहते हैं। और इससे सभी त्रस्त भी हैं। लेकिन कुछ कारणों से हम इनके खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं, वजह है अपराधियों व दबंगो से दुश्मनी का डर, राजनैतिक व सामाजिक दबाव, निजी जिंदगी में समय की कमी होना व कानूनी पचड़ो में फंसने का डर। इसके लिए प्रयास परिवार एक प्लेटफार्म देगा। जहाँ शिकायत करने पर शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जाएगा। तथा हिन्दुस्तान 1st की टीम कानूनी टीम से सलाह करके शिकायत तैयार करवाएगी। तथा संबंधित विभाग को शिकायत भेजेगी, इससे शिकायतकर्ता का डर खत्म हो जाएगा। तथा संबंधित अधिकारी भी किसी को शिकायतकर्ता का नाम नहीं बता पाएगा तथा संगठन की ताकत के कारण संबंधित अधिकारी समस्या के समाधान पर काम करेगा ना कि अनैतिक सांठगांठ पर।
  5. समाज में जनजागरण व समस्याओं के समाधान के लिए मीडिया का अपना एक रोल होता है। उपरोक्त की गई शिकायतों के समाधान के लिए व समाज में फैले भ्रष्टाचार व बुराई के खिलाफ लडऩे के लिए मीडिया एक हथियार साबित हो सकता है। इसलिए हिन्दुस्तान 1st बनाने के लिए हर मीडिय़ा प्लेटफोर्म का सशक्त प्रयोग किया जाएगा। परिवार का अपना एक अखबार पंजीकृत कराया गया है। तथा इसके साथ सोशल मीडिया द्वारा भ्रष्ट व भ्रष्टाचार की आवाज उठाई जाएगी। तथा लोगों में देश प्रेम की भावना का जागरण किया जाएगा। ताकि हर नागरिक जागृत हो और हिन्दुस्तान विश्व गुरु बने। आरटीआई, आरटीई के साथ–साथ हिन्दुस्तान 1st के साथ जुड़ते ही सभी सदस्यों को आरटीए (राईट टू आस्क) का अधिकार भी मिल जाएगा। क्योंकि सभी सदस्य प्रयास परिवार के पंजीकृत अखबार के स्वतंत्रत पत्रकार भी होंगे और प्रमुखता से अपने क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार व अन्य समस्याओं के खिलाफ इस अखबार के माध्यम से आवाज उठाएंगे तथा अधिकारियों से किसी भी काम के न होने के कारण को पूंछ कर जवाबदेही तय करेंगे।
  6. हिन्दुस्तान को विश्व में 1st बनाने के लिए जो सबसे जरूरी चीज है वो है सभी नागरिकों मेें स्वदेशप्रेम की भावना जगाना। तथा उन्हें अधिक से अधिक हिन्दुस्तानियों द्वारा बनाए गए या हिन्दुस्तान में बने सामान का सामान्य जीवन में अधिक से अधिक प्रयोग करना। क्योंकि जब भारत आजाद हुआ था, उस समय हमारा एक रूपया एक डॉलर के समान था। यह हमारी विदेशी अंधेपन की दौड़ का ही परिणाम है कि आज एक डॉलर की किमत लगभग 70 रूपए है।
  7. उपरोक्त सभी बातों को नागरिकों के जीवन में अमल लाने के लिए सबसे जरूरी चीज है फॉलो-अप। सामान्य जीवन में नागरिक अपने जीवनकाल में मात्र मोर्निंग वॉक सेट करने में कई साल लगा देता है। जब तक कि उसके कुछ साथी साथ ना जुड़ जाएं। इन बातो पर अमल करने के लिए कैसे आसानी से तैयार होंगे। इन्ही चीजों को ध्यान में रखते हुए टीम का पूरा ध्यान केवल फॉलो-अप पर ही रहेगा व परिवार के सभी सदस्य मिलकर एक–दूसरे का सहयोग करके हिन्दुस्तान को 1st बनाकर ही रहेंगे। तथा इसके लिए ज्यादा से ज्यादा नागरिकों को प्रयास परिवार का सदस्य बनाएंगे और बार–बार स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग का आह्वान करेंगे।